Cross-site scripting (XSS) in Hindi

what is Cross-site scripting

क्रॉस-साइट स्क्रिप्टिंग (XSS) एक web vulnerability है। इस web vulnerability का का उपयोग करके attacker किसी web application और website के client-side code में malicious executable scripts को injects करके attack करता है। इन malicious scripts का उपयोग sensitive information चुराने, manipulate और deface web content करने, hijack user sessions करने या अन्य user के खिलाफ आगे attack शुरू करने के लिए किया जा सकता है। इस XSS vulnerability के कारण आपका पूरा सिस्टम compromise तक हो सकता है।

How does Cross-site-scripting work ?

Cross – site – scrpting एक प्रकार का injection attack है। यदि कोई attacker ,user input parameter में जावास्क्रिप्ट कोड को include करने में सक्षम होता है और एप्लिकेशन सीधे उस JS कोड को अपने HTML आउटपुट में return करके client browser को भेजता है, तो ब्राउज़र malicious JavaScript को execute करेगा।

  1. Injection : एक attacker एक वेब पेज और एप्लिकेशन में malicious code (usually JavaScript)) को inject करता है। यह इंजेक्शन input fields, URLs, या किसी अन्य तरीके से हो सकता है जिससे वेबसाइट user input को accepts करती है।
  2. Execution : जब कोई victim उस page को visit करता है जहां पर इंजेक्ट किया गया कोड रहता है, तो वह malicious code उनके ब्राउज़र में execute होता है। चूँकि ब्राउज़र egitimate और injected code के बीच अंतर नहीं बता सकते हैं, इसलिए वे इस कोड को run करते हैं जैसे कि यह कोड उस वेबसाइट का हिस्सा हो।
  3. Exploitation : इंजेक्ट किया गया कोड विभिन्न harmful चीजें कर सकता है, जैसे कुकीज़ चुराना (session information), users को phishing sites पर redirect करना, page content को modify करना, या यहां तक ​​कि user session का control करना।

Types of cross-site scripting vulnerabilities

  1. Reflected XSS (non-persistent XSS) : Reflected XSS scripting एक प्रकार की क्रॉस-साइट स्क्रिप्टिंग (XSS) है जहां attacker वेब एप्लिकेशन पर पेलोड नहीं भेजता है। इसके बजाय attacker , victim को एक URL भेजता हैं जिसमें payload (अक्सर अस्पष्ट) शामिल होता है। victim , URL पर क्लिक करता है और vulnerable web application को open करता है, जिससे अनजाने में पेलोड execute हो जाता है। Reflected cross-site scripting को non-persistent cross-site scripting भी कहा जाता है जिसका अर्थ है कि पेलोड सर्वर पर permanently store नहीं होता है।
  2. Stored XSS (persistent XSS) : Stored cross-site scripting एक प्रकार की क्रॉस-साइट स्क्रिप्टिंग (XSS) है जहां attacker पहले payload को वेब एप्लिकेशन पर भेजता है, फिर एप्लिकेशन payload को store (उदाहरण के लिए, डेटाबेस या सर्वर – साइड टेक्स्ट फ़ाइलें मे) करता है और अंत में, एप्लिकेशन अनजाने में अपने वेब पेजों पर आने वाले प्रत्येक victim के लिए payload executes करता है। Stored cross-site scripting को persistent cross-site scripting भी कहा जाता है। जिसका अर्थ है कि पेलोड सर्वर पर permanently store रहता है। और एक समय में एक साथ कई यूजर को affect कर सकता है।

How can you avoid XSS vulnerabilities?

किसी एप्लिकेशन के development life cycle के शुरुआत में ही security rules / plans को implement करना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, सॉफ़्टवेयर डिज़ाइन के समय security activities जैसे architecture risk analysis और threat modeling करना। और एप्लिकेशन development पूरा होने के बाद security testing करना भी महत्वपूर्ण है। XSS हमलों को रोकने में मदद के लिए यहां कुछ प्रमुख strategies दी गई हैं।

  1. Input Validation and Sanitization: Form fields, URL parameters, cookies, और HTTP headers से डेटा सहित सभी user input को Validate और sanitize करें। यह conforms करने के लिए input validation का उपयोग करें कि यूजर इनपुट दिए गए formates के अनुरूप है या नहीं , और dangerous characters और scripts को remove या encode करने के लिए sanitization techniques का प्रयोग करें।
  2. Output Encoding : Browsers दवारा executable code को interpreting करने से रोकने के लिए HTML, CSS, JavaScript, या अन्य contexts में render करने से पहले सभी user-generated content और dynamic data को एन्कोड करें। HTML entity encoding, URL encoding, or JavaScript escaping जैसी उपयुक्त एन्कोडिंग तकनीकों का उपयोग करें।
  3. Content Security Policy (CSP) : Content के trusted sources को specify करने और inline scripts, event handlers, और अन्य risky features के execution को restrict करने के लिए एक Content Security Policy (CSP) को implement करे। CSP उन location की limiting करके XSS attacks के impact को कम करने में मदद करता है जहां से स्क्रिप्ट load और execute की जा सकती हैं।
  4. Regular Security Audits and Penetration Testing: अपने वेब पेज या वेब एप्लिकेशन में XSS vulnerabilities को identify करने और उनका समाधान करने के लिए regular security audits और penetration testing करें। security flaws का पता लगाने और existing security controls की effectiveness का आकलन करने के लिए automated scanning tools और manual code reviews का उपयोग करें।

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